Friday, September 26, 2008

एक शाम

जब किसी की आँख का पानी,
किसी का आबे-हयात हो जाए,
जब घरों में मौत,
शहर की आम बात हो जाए,
जब चिराग ही जलने लगें घर को
और घरों की हया नीलाम हो जाए,
तो ऐसे में क्यूँ ना मेरे मौला ,
एक शाम तेरे नाम हो जाए.

मनुज मेहता

10 comments:

MANVINDER BHIMBER said...

जब किसी की आँख का पानी,
किसी का आबे-हयात हो जाए,
Manuj ji kya baar hai....bahut umda

मोहन वशिष्‍ठ said...

जब किसी की आँख का पानी,
किसी का आबे-हयात हो जाए,
जब घरों में मौत,
शहर की आम बात हो जाए,
जब चिराग ही जलने लगें घर को
और घरों की हया नीलाम हो जाए,
तो ऐसे में क्यूँ ना मेरे मौला ,
एक शाम तेरे नाम हो जाए.

बहुत अच्‍छी रचना मनुज जी बधाई हो आपको ये वर्ड्स वेरिफिकेशन हटा दो यार

Ila's world, in and out said...

बहुत ही बढिया रचना के लिये बधई स्वीकार करें.

रश्मि प्रभा... said...

तो ऐसे में क्यूँ ना मेरे मौला ,
एक शाम तेरे नाम हो जाए.....
अल्लाह की दुआ हो जाये
कलम में सरस्वती का वास हो जाये

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

सुन्दर कविता। आबे-हयात यानि अमृत। कानों में यही घुल गया लगता है।
स्वागत है आपका। नियमित लिखते रहिए।

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.


डेश बोर्ड से सेटिंग में जायें फिर सेटिंग से कमेंट में और सबसे नीचे- शो वर्ड वेरीफिकेशन में ’नहीं’ चुन लें, बस!!!

श्यामल सुमन said...

मनुज जी

जब किसी की आँख का पानी,
किसी का आबे-हयात हो जाए,

पंक्तियाँ अच्छी लगी। शुभकामना।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

अभिषेक मिश्र said...

kafi samvedansheel post hai. Swagat.(Abhishek)

प्रदीप मानोरिया said...

जब चिराग ही जलने लगें घर को
और घरों की हया नीलाम हो जाए,सार्थक सटीक और शानदार आपका हिन्दी चिठ्ठा जगत में हार्दिक स्वागत है . मेरी नई पोस्ट पढने आप मेरे ब्लॉग "हिन्दी काव्य मंच " पर सादर आमंत्रित हैं

Vineeta Yashsavi said...

blog jagat mai apka swagat hai