Wednesday, November 26, 2008

ऐ ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी आ,
इक शाम मेरे घर भी आ.
करेंगे बैठकर दो चार बातें,
मेरी पोटली में बहुत कुछ है जो है दिखाना तुझको,
मेरे पास बहुत कुछ है जो है सुनाना तुझको.

हैरान ना होना,जो इक बात पूछूँ तुमसे,
सुना है!
बहुत खूबसूरत हो तुम?
गर ये सच है
तो परदे में आना ऐ ज़िन्दगी,
अब तो हर खूबसूरत चीज़ डराती है मुझको.

ये जो चाँद है न! सोचता हूँ तोड़ लूँ इसको,
ये जो तारे हैं, सोचता हूँ नोच लूँ इनको,
और सजा लूँ अपने घर के आँगन में.

सोचता हूँ अब तो घर में खुशियाँ ही रखूँ,
ये जो मैले से गम हैं इन्हे अलविदा कर दूँ.

उकता गया हूँ इस तरह जीने से मैं,
थक गया हूँ ख़ुद को ख़ुद ही से मिलाने में मैं.

तुम आओ तो मेरा पता देना,
हो सके तो कुछ और भी बता देना.

मैं आँगन में खड़ा हूँ,
तक रहा हूँ रास्ता तेरा.

ऐ ज़िन्दगी आ इक शाम मेरे घर भी,
करेंगे बैठकर दो चार बातें.

29 comments:

makrand said...

ऐ ज़िन्दगी आ इक शाम मेरे घर भी,
करेंगे बैठकर दो चार बातें.
good composition
regards

अल्पना वर्मा said...

तुम आओ तो मेरा पता देना,
हो सके तो कुछ और भी बता देना.

bahut khuub likha hai!
break ke baad blogging mein aap ka swagat hai..asha hai aur bhi sundar rachnayen padhne ko milengi.

[aap ka mere blog par aana achcha laga.
kavita-'parivartan aayega ' meri likhi hui nahin hai--wah pradeep ji ki likhi hui hai.introduction mein diya hua hai.
kavita pasand karne ke liye dhnywaad.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

ऐ ज़िन्दगी आ,
इक शाम मेरे घर भी आ.
करेंगे बैठकर दो चार बातें,

बहुत खूब ..मीठे गाने का सा आभास है आपकी इस रचना में

Neilina said...

ऐ ज़िन्दगी आ इक शाम मेरे घर भी,
करेंगे बैठकर दो चार बातें......what if LIFE will come to your home? Can you then also say all the things that are there in your heart? Can you find words for all your feelings?

नीरज गोस्वामी said...

मनुज जी बहुत अच्छी रचना है....जिंदगी के साथ ये ही खराबी है.-..जब तक ख्वाब में है खूबसूरत लगती है लेकिन हकीकत में सामने आने पर कुछ और ही नजर आने लगती है..-.आप बहुत कमाल का लिखते हैं...आप को पढ़ना एक अनुभव है....
नीरज

डॉ .अनुराग said...

बहुत खूब.......अरसे बाद दिखे

singhsdm said...

Mnuj ji
Welcome back from Goa. plz keep touch with us through blog.Write some about Goa beaches what u found there and write travel-louge.I m waiting eagerly

singhsdm said...

Mnuj ji
Welcome back from Goa. plz keep touch with us through blog.Write some about Goa beaches what u found there and write travel-louge.I m waiting eagerly

seema gupta said...

मैं आँगन में खड़ा हूँ,
तक रहा हूँ रास्ता तेरा.
ऐ ज़िन्दगी आ इक शाम मेरे घर भी,
करेंगे बैठकर दो चार बातें.
"" मेरे घर आना . आना जिन्दगी, अनायास ही ये गाना याद आ गया...जिन्दगी के इन्तजार मे एक उम्र गुजर दी, ना आना था ना आयी इधर..."
"सुंदर अभीव्यक्ति"
Regards

मनुज मेहता said...

रंजना जी, और सीमा जी, आपके कई रूप देखे हैं मैंने. आपको यह कविता अपने करीब लगी और आपने इसे अपनाया, मेरा ये सौभाग्य है.

mehek said...

bahut khubsura rahcana,badhai

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर भाव पुर्ण आप की यह कविता.
धन्यवाद

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल से वापिसी की है आपने मनुज जी ... आपके द्वारा प्रेषित फोटो पर मैंने भी कविता भेजी है हिन्दयुग्म मैं आशा है आपको पसंद आयेगी

kmuskan said...

ऐ ज़िन्दगी आ इक शाम मेरे घर भी,
करेंगे बैठकर दो चार बातें.

bahut khubsurat rachna

Akshaya-mann said...

bahut khub likha hai mere dost
dil chu liya.
ek nazar idhar bhi majbura nahi karta lekin jaruri hai
मैंने मरने के लिए रिश्वत ली है ,मरने के लिए घूस ली है ????
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑

आप पढना और ये बात लोगो तक पहुंचानी जरुरी है ,,,,,
उन सैनिकों के साहस के लिए बलिदान और समर्पण के लिए देश की हमारी रक्षा के लिए जो बिना किसी स्वार्थ से बिना मतलब के हमारे लिए जान तक दे देते हैं
अक्षय-मन

hindustani said...

आप ज़िन्दगी से कहेयेगा मेरे घर भी एक बार तो जरूर आए मेरे दिल मैं भी बहूत सी बाते है खेने को

BrijmohanShrivastava said...

आपके कमरे बगैर चैन नहीं पढ़ती और आप घर से बाहर निकल ही नहीं रहे हैं

जितेन्द़ भगत said...

सुंदर अभि‍व्‍यक्‍ति‍।

रंजना said...

वाह ! नव आशा का संचार कराती जिंदगी से मिलाती हुई बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति.

bhoothnath said...

ऐ ज़िन्दगी आ इक शाम मेरे घर भी,
करेंगे बैठकर दो चार बातें.
ab main kya baat karun....haan..!!
manuj ji bade din hue aapki jindgi se mike.....!!milayiye naa !!

शोभा said...

वाह! मनुज जी,
बहुत सुंदर लिखा है. मन के सूक्ष्म भावों को शब्दों क तारों में बांधा है. पढ़कर बहुत अच्छा लगा.

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

बहुत ही बढ़िया रचना . बधाई मनुज जी.

Harkirat Haqeer said...

मनुज जी, हिन्‍द-युग्‍म में भी पढा है आपको हमेशा अच्‍छा लिखते हैं आप ...ये रचना तो बहुत ही
अच्‍छी लगी.... बधाई ..और हाँ आपके चित्र भी बहुत गहराई लिए होते हैं।

मनुज मेहता said...

Harkirat ji
eh taan mere layi khushi di gal hai ki tuhanu mera likhya changa lagya. koshish rahegi ki aage vi chnga likhda ravaan.

soch said...

very very amazing creation, too good flow of feelings. great

Vijay Kumar Sappatti said...

manuj bhai ...

bahut din hue kuch likha nahi ...aapke lekhan ki pratiksha rahti hai ....

aaj is poem ko padha, na padhta to kitna kuch kho deta yaar.. yaar aap to bus mere jaise hi ho.. dil choo dete ho ..

तुम आओ तो मेरा पता देना,
हो सके तो कुछ और भी बता देना.

main aur kuch nahi kah paaunga , is poem ke liye ..

meri nayi poem aapke comment ka intjaar kar rahi dost..

vijay
www.poemsofvijay.blogspot.com

Mayank said...

dost,

bohat khuub likhte ho aap.. mazaa aa gaya paDh kar.. behad behad asar daar aur dil ko chhu lene waali kavita hai aap ki.. likhte rahe.n.. aise hii...

kabhii waqt mile to yahaa.n bhii dekhiyegaa..

www.ghaafil.blogspot.com

shukriyah!

Mayank

Madhuminal said...

bahut khubsurat likhte ho padne ke baad mann hi mann magan ho jati hun

Anonymous said...

ANKIT UNIYAL

उकता गया हूँ इस तरह जीने से मैं,थक गया हूँ ख़ुद को ख़ुद ही से मिलाने में मैं.

awesome lines <3
reality